UP Highway Trauma Center 2026: सड़क हादसे के घायलों को अब CHC में मिलेगा 24 घंटे मुफ्त इलाज, जानें पूरी योजना

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सड़क हादसों में घायलों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। राज्य में हाईवे किनारे स्थित पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) को ट्रॉमा सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां दुर्घटना में घायल मरीजों को 24 घंटे इलाज की सुविधा मिलेगी। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले मरीजों को तुरंत प्राथमिक उपचार के साथ-साथ विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में इलाज उपलब्ध कराया जा सकेगा। अभी तक ऐसी स्थिति में मरीजों को जिला अस्पताल या बड़े मेडिकल सेंटर के लिए रेफर किया जाता था, जिससे इलाज में देरी हो जाती थी।

इन क्षेत्रों के CHC होंगेअपग्रेट

स्वास्थ्य विभाग द्वारा तैयार की गई योजना के अनुसार, हाईवे से सटे पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को प्राथमिकता के आधार पर ट्रॉमा सेंटर में बदला जाएगा। इन स्वास्थ्य केंद्रों में आधुनिक चिकित्सा उपकरण, आईसीयू सुविधा, जांच केंद्र तथा प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ की तैनाती की जाएगी।

24 घंटे उपलब्ध रहेगी सुविधा

अपग्रेड किए जाने वाले इन ट्रॉमा सेंटर में मरीजों के लिए चौबीसों घंटे इमरजेंसी सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। यहां एक्स-रे, पैथोलॉजी जांच, ऑक्सीजन सपोर्ट तथा अन्य आवश्यक चिकित्सा सेवाएं भी मुहैया कराई जाएंगी, जिससे दुर्घटना के बाद गोल्डन ऑवर में इलाज संभव हो सके।

अब निजी अस्पतालों में भी मिलेगा मुप्त इलाज

केंद्र सरकार द्वारा लागू कैशलेस ट्रीटमेंट ऑफ रोड एक्सीडेंट विक्टिम्स योजना-2026 के तहत राज्य के 82 सरकारी एवं निजी अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया है। इन अस्पतालों में सड़क दुर्घटना के घायलों को मुफ्त इलाज की सुविधा दी जाएगी। इस योजना के अंतर्गत दुर्घटना पीड़ितों के इलाज पर होने वाले खर्च का वहन जिला सड़क सुरक्षा समिति द्वारा किया जाएगा। प्रत्येक घायल मरीज के इलाज पर अधिकतम डेढ़ लाख रुपये तक का खर्च कवर किया जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की तैयारी

स्वास्थ्य विभाग ने ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने के लिए कार्ययोजना तैयार कर ली है। बजट मिलने के बाद डेढ़ से दो महीने के भीतर इन केंद्रों को पूरी तरह तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।

इस पहल से राज्य में सड़क दुर्घटनाओं के दौरान होने वाली मृत्यु दर को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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